RSS को Ban कर लोग क्या करेंगे? जनता ने पहले ही हां कह दी है- दत्तात्रेय

सत्येन्द्र सिंह ठाकुर
सत्येन्द्र सिंह ठाकुर

मध्य प्रदेश के जबलपुर में आयोजित अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल बैठक के दूसरे दिन, RSS महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के “RSS पर प्रतिबंध” वाले बयान का ज़ोरदार जवाब दिया।
उन्होंने कहा — “RSS पर प्रतिबंध लगाने से क्या हासिल होगा? जनता ने हमें पहले ही स्वीकार कर लिया है। हम राष्ट्र निर्माण में लगे हैं, और समाज ने हमें मान्यता दी है।”

100 साल का सफर और एक नया विवाद

RSS की यह बैठक संघ के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में बुलाई गई थी, जिसमें सरसंघचालक मोहन भागवत भी शामिल थे।
बैठक में न सिर्फ शताब्दी समारोह की रूपरेखा पर चर्चा हुई, बल्कि कांग्रेस के हालिया बयानों पर भी बात हुई।
होसबोले ने कहा — “संघ संविधान के भीतर रहकर कार्य करता है, और प्रतिबंध की बातें राजनीति से प्रेरित हैं।”

खड़गे का बयान और संघ का पलटवार

कुछ दिन पहले मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि “अगर प्रधानमंत्री वल्लभभाई पटेल के विचारों का सम्मान करते हैं, तो RSS पर प्रतिबंध लगना चाहिए।”
उन्होंने RSS और BJP पर कानून-व्यवस्था की समस्या और ‘युवाओं के ब्रेनवॉश’ का आरोप लगाया था। इस पर RSS ने पलटवार करते हुए कहा — “देश को जोड़ने वाला संगठन अगर किसी को डराता है, तो डर राजनीति का है, राष्ट्र का नहीं।”

RSS का इतिहास: विवाद और वैचारिक विरासत

1925 में केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा स्थापित RSS आज देश का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है। 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद इस पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया था, लेकिन जांच में किसी प्रत्यक्ष संलिप्तता के सबूत नहीं मिले। आज, संघ शिक्षा, समाज सेवा, पर्यावरण, संस्कृति और राष्ट्रनिर्माण के कार्यों में सक्रिय है।

“खड़गे जी, RSS पर बैन नहीं, बैलेंस चाहिए!”

अब हर पार्टी वैचारिक टॉनिक पीकर मैदान में है। RSS पर बैन की बात करना वैसा ही है जैसे ‘फिल्टर कॉफी में शुगर फ्री डालकर कहना कि स्वाद वही रहेगा!’
जनता अब न नारों से बहकती है, न बैन से डरती है — बस पूछती है, “काम कौन करेगा?”

RSS बनाम कांग्रेस की यह बहस सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि विचारों की जंग है। एक तरफ “संगठन” है जो खुद को राष्ट्र का सेवक कहता है, दूसरी तरफ “विपक्ष” जो इसे चुनौती देना चाहता है। अब जनता तय करेगी कि “100 साल के संघ” के सामने “5 साल की राजनीति” कितनी टिकती है।

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